ग़ज़ल
उत्तरी पवन, उठो!
شمالی پون، اٹھو!
यह ग़ज़ल उत्तरी पवनों को आह्वान करती है कि वे तीव्र शक्ति के साथ जागें और उठें। यह कैलाश पर्वत से, शिव और जोगमाया का आह्वान करते हुए, कल्पना करती है और पवनों से आग्रह करती है कि वे बाधाओं को तोड़कर बेकाबू घोड़ों की तरह आगे बढ़ें। यह कविता अप्रतिबंधित गति और परिवर्तनकारी ऊर्जा के लिए एक शक्तिशाली निवेदन प्रस्तुत करती है।
गीत सुनें
1
ઓતરાદા વાયરા, ઊઠો ઊઠો હો તમે -
ઓતરાદા વાયરા, ઊઠો!
यह उत्तरी हवाओं से उठने और बहने का आह्वान है।
2
કૈલાસી કંદરાની રૂપેરી સોડ થકી
ઓતરાદા વાયરા, ઊઠો!
कैलाश की चांदी-सी गुफा के किनारे से, हे उत्तरी हवाओ, उठो!
3
ધૂણન્તાં શિવ-જોગમાયાને ડાકલે
હાકલ દેતા, હો વીર, ઊઠો!
जब शिव-योगमाया ढोल की थाप पर झूम रही हैं, तब एक ललकार दी जा रही है: हे वीर, उठो!
4
ભીડ્યાં દરવાજાની ભોગળ ભાંગીને તમે
પૂરપાટ ઘોડલે છૂટો! -ઓતરાદા.
बन्द दरवाज़ों की कुंडी तोड़कर, तुम घोड़े पर तेज़ी से निकल पड़ो!
5
ધરતીના દેહ પરે ચડિયા છે પુંજ પુંજ
સડિયેલાં ચીર, ધૂળ, કૂંથો;
धरती के शरीर पर ढेर के ढेर सड़े हुए चिथड़े, धूल और कूड़ा जमा हो गया है।
6
જોબનનાં નીર મહીં જામ્યાં શેવાળ-ફૂગ
ઝંઝાનાં વીર, તમે ઊઠો! -ઓતરાદા.
जवानी के पानी में शैवाल और फफूंद जम गए हैं। हे आँधी के वीरों, उठो!
7
કોહેલાં પાંદ-ફૂલ ફેંકી નાખો રે, ભાઈ!
કરમાતી કળીઓને ચૂંટો;
हे भाई, मुरझाए हुए पत्तों और फूलों को फेंक दो, और मुरझाती कलियों को तोड़ लो।
8
થોડી ઘડી વાર ભલે બુઝાતા દીવડાઃ
ચોર-ધાડપાડ ભલે લૂંટો! -ઓતરાદા.
दीपक भले ही थोड़ी देर के लिए बुझ जाएं: चोर और लुटेरे भले ही लूटपाट करें! -हे उत्तर के वासियों।
9
છો ને છૂંદાય મારી કૂણેરી કૂંપળોઃ
સૂસવતી શીત લઈ છૂટો;
भले ही मेरी कोमल कोंपलें कुचल दी जाएँ, तुम सरसराती ठंड लेकर चले जाओ।
10
મૂર્છિત વનરાજિનાં ઢંઢોળો માથડાં,
ચીરો ચમકાટ એનો જૂઠો! -ઓતરાદા.
हे उत्तर पवन, मूर्छित वनपंक्ति के सिरों को हिलाओ और उसकी झूठी चमक को फाड़ दो।
11
ઊઠો, કદરૂપ! પ્રેતસૃષ્ટિના રાજવી!
ફરી એક વાર ભાંગ ઘૂંટોઃ
अरे बदसूरत, प्रेतलोक के राजा! एक बार फिर भांग घोलो।
12
ભૂરિયાં લટૂરિયાંની આંધીઓ ઉરાડતા
હુહુકાર-સ્વરે કાળ, ઊઠો! -ઓતરાદા.
बिखरे हुए भूरे बालों की आँधियाँ उड़ाते हुए, गर्जनापूर्ण स्वर में, हे काल, उठो! - उत्तर दिशा से।
13
કવિઓના લાડકડા મલયાનિલ મંદ મંદ!
રહેજે ચંદનની ગોદ સૂતો;
हे कवियों की प्रिय मंद मंद बहने वाली मलय पवन! चंदन की गोद में सोते रहना।
14
નથી નથી પર્વ પુષ્પધન્વાનું આજઃ ઘોર
વિપ્લવના ઢોલડા ધડૂકો! -ઓતરાદા.
नहीं, नहीं, आज कामदेव का उत्सव नहीं है। भीषण क्रांति के नगाड़े बजाओ! हे उत्तर।
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