વાલીડાનાં વીંઝાતાં અંગ; હાથ કેરી છાજલીમાં બળે મારો દીવડો,

“As my beloved's body sways and turns,Within the shelter of my cupped hands, my lamp still burns.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

प्रियतम के अंगों के हिलने-डुलने के बावजूद, मेरे हाथों की छांव में मेरा दीपक जल रहा है।

विस्तार

यह दोहा एक नाजुक दीये को बचाते हुए उसके संघर्ष को दर्शाता है। कल्पना कीजिए कि आपके प्रिय के अंग हवा में हिल रहे हैं, शायद नृत्य कर रहे हैं या मस्ती में झूल रहे हैं। इन मोहक गतिविधियों के बीच, जो हल्की हवा पैदा करती हैं, कवि अपने हाथ में जलते हुए अपने छोटे से दीये को बड़ी सावधानी से बचा रहा है। यह दीया उसकी आशा, प्रेम या आत्मा का प्रतीक है। यह कविता हमें दिखाती है कि कैसे हम अपने भीतर की नाजुक लौ को बाहरी दुनिया की सुंदर लेकिन कभी-कभी विचलित करने वाली ताकतों से बचाते हैं, उसे प्यार और देखभाल से जीवित रखते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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