किसे ख़बर है कि हंगामा-ए-नशूर है क्या
तिरी निगाह की गर्दिश है मेरी रुस्ता-ख़ेज़
“Who knows what a commotion, a frenzy, is, Is it the sway of your glance, which is my wanderer?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
किसे पता कि यह कैसा हंगामा-ए-नशूर है, क्या यह तेरी निगाह की गर्दिश है जो मुझे भटकने पर मजबूर कर रही है।
विस्तार
यह शेर उस अजब, बेहिसाब इश्क़ की बात करता है, जो अचानक और बिना किसी वजह के दिल में उथल-पुथल मचा दे। शायर कहते हैं कि यह हंगामा किसी बाहरी घटना से नहीं है, बल्कि महबूब की एक साधारण सी नज़र (निगाह) की गर्दिश से पैदा हुआ है। यह इश्क़ की उस बेबस हालत को बयां करता है, जब महबूब की एक झलक ही पूरे जीवन को एक तूफ़ान में बदल दे।
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