छुपती नहीं है ये निगह-ए-शौक़ हमनशीं फिर और किस तरह उन्हें देखा करे कोई

“This gaze of longing, O beloved, cannot be hidden, How then shall any person behold them?”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

यह चाहत भरी निगाह छिप नहीं सकती, तो फिर कोई उन्हें और किस तरह देख पाएगा।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा है, क्योंकि यह बताता है कि इश्क़ को छुपाया नहीं जा सकता। शायर कहते हैं कि जब किसी के लिए प्यार इतना गहरा हो जाए, तो वो नज़रों से छिपना असंभव है। आपकी हर निगाह, हर नज़र में वो प्यार झलक आता है। इसलिए शायर पूछते हैं कि अगर यह प्यार दिख ही रहा है, तो आप उन्हें और किस नज़र से देखोगे? यह दिल की बात है, जो आँखों से बाहर आ जाती है।

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