या शर-ए-मुसलमानी या दैर की दरबानी
या नारा-ए-मस्ताना काबा हो कि बुत-ख़ाना
“Oh, be it the arrow of the Muslims, or the watchtower of the monastery; or the cry of the ecstatic, be it the Kaaba or the idol-house.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
या मुसलमानी शर या दैर की दरबानी, या मस्ताना नारा काबा हो या बुत-ख़ाना।
विस्तार
यह शेर भक्ति और आस्था की सीमाओं पर एक गहरा सवाल उठाता है। शायर कहते हैं कि चाहे हम इस्लामी अनुशासन का पालन करें, या किसी मठ की दरबानी करें... या मस्ताना नशा हो, या काबा का तीर्थ। लेकिन शायर यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या ये सब बस दिखावा है? क्या ये सारी आस्थाएं, ये सब बस किसी 'बुत-ख़ाने' (मूर्ति पूजा) से ज्यादा कुछ नहीं!
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
