या अक़्ल की रूबाही या इश्क़-ए-यदुल-लाही
या हीला-ए-अफ़रंगी या हमला-ए-तुरकाना
“Whether it is the charm of intellect, or the love of God, / Whether it is the manner of the foreigner, or the attack of the peacocks.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
क्या यह बुद्धि का आकर्षण है या ईश्वर का प्रेम, या यह विदेशी का तरीका है या मोर का हमला।
विस्तार
यह शेर केवल मोहब्बत की बात नहीं करता, बल्कि यह एक गहरा फ़लसफ़ा है। शायर हमें एक चुनाव के सामने खड़ा कर रहे हैं—क्या हमें सिर्फ़ अक़्ल की दुनिया में रहना चाहिए, या फिर इश्क़-ए-यदुल-लाही... क्या हमें उन बाहरी, आधुनिक चीज़ों के बहकावे में बह जाना चाहिए? यह शेर आज के दौर के हर इंसान को आईना दिखाता है कि उसका असली जुनून किस चीज़ के लिए है।
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