“In my asceticism, in my royalty, in my servitude, Nothing works without the boldness of the wanderer.”
मेरी में फ़क़ीरी में शाही में ग़ुलामी में, कुछ काम नहीं बनता बे-जुरअत-ए-रिंदाना। (अर्थात, मेरी (मेरा) अवस्था, फ़कीरी (संन्यासी जीवन) या शाही (शाही जीवन) या ग़ुलामी (गुलाम जीवन) में, कुछ भी काम नहीं आता बे-जुरअत-ए-रिंदाना (यानी, अकेले या बेपरवाह साहस) के बिना।)
यह शेर जीवन के सबसे बड़े सच को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जीवन में आप चाहे फकीर बनकर रहें, राजा बनकर, या गुलाम बनकर... कोई भी राह चुनें, लेकिन अगर आपके अंदर हिम्मत नहीं है, तो कुछ भी हासिल नहीं होगा। असली दौलत तो आपके जज़्बे की ज़ुरअत में है।
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