या संजर ओ तुग़रल का आईन-ए-जहाँगीरी
या मर्द-ए-क़लंदर के अंदाज़-ए-मुलूकाना
“Oh, Sanjar, the mirror of the world of Jahangiri, Oh, man of the Kalandar, with the style of a queen.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
हे संजर, जहाँगीरी की दुनिया का आईना, और कवलंदर के मर्द के अंदाज़ में रानी जैसा।
विस्तार
यह शेर असल में दो तरह के जीवन जीने के तरीके का ज़िक्र करता है। एक तरफ़ है 'जहाँगीरी' का नज़ाकत भरा, शाही अंदाज़, जो महलों में मिलता है। और दूसरी तरफ़ है 'क़लंदर' का अंदाज़—जो आज़ादी, सादगी और बेबाकी से भरा होता है। शायर साहब पूछ रहे हैं कि आप किस तरह की पहचान को अपनाना चाहते हैं, क्या दिखावा या असली रूहानी अंदाज़!
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