यूँ हाथ नहीं आता वो गौहर-ए-यक-दाना
यक-रंगी ओ आज़ादी ऐ हिम्मत-ए-मर्दाना
“That gem of a single grain, I cannot reach it; oh, single-hued freedom, O courage of a man.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
वह एक दाने जैसा रत्न मेरे हाथ नहीं आता; हे एक रंग वाली आज़ादी, हे पुरुष का साहस।
विस्तार
यह शेर, जो अल्लामा इकबाल साहब का है, सच्ची आज़ादी के अनमोल पहलू को छूता है। शायर कहते हैं कि वह एक ही दाने का अनमोल मोती (गौहर-ए-यक-दाना) — यानी आज़ादी... न ही आसानी से हाथ आता है। इसके लिए चाहिए हिम्मत-ए-मर्दाना, पुरुषों का वो हौसला! यह बस एक एहसास नहीं है, यह एक संघर्ष है.... यह बताता है कि सच्ची आज़ादी सिर्फ़ ख्वाहिश नहीं, बल्कि एक बड़ी तपस्या है!
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