न दिया निशान-ए-मंज़िल मुझे ऐ हकीम तू ने मुझे क्या गिला हो तुझ से तू न रह-नशीं न राही

“Oh healer, you did not give me the sign of my destination; what complaint can I have against you, you are neither captive nor traveler.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

हे वैद्य, आपने मुझे मंज़िल का निशान नहीं दिया; मुझे तुमसे क्या शिकायत है, तुम न रहने वाले हो न राहगीर।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब हमें किसी भरोसेमंद इंसान से उम्मीदें होती हैं, लेकिन वह इंसान हमें राह भी नहीं दिखाता और न ही रहता भी है। शायर यहाँ एक 'हकीम' से गुहार लगा रहे हैं—वो तो न राह दिखाने वाला था, न ही कहीं बसने वाला। यह अहसास कि आप पूरी तरह अकेले हैं, बहुत गहरा होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.