जहान-ए-सौत-ओ-सदा में समा नहीं सकती — अल्लामा इक़बाल

जहान-ए-सौत-ओ-सदा में समा नहीं सकती लतीफ़ा-ए-अज़ली है फ़ुग़ान-ए-चंग-ओ-रबाब

“In the world of sound and echoes, it cannot be contained; / It is the subtle melody of the flute and the rabaab.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

सौंदर्य की यह बात ध्वनि और गूँज की दुनिया में समा नहीं सकती; यह चंग और रबाब की अद्भुत मधुरता है।

विस्तार

यह शेर जीवन के दो विपरीत पहलुओं को दिखाता है। शायर कहते हैं कि इस दुनिया का जो शोर-शराबा है, जो आवाज़ों का जहान है, उसमें वो गहरा, अज़ली रहस्य समा नहीं सकता। वह रहस्य... सिर्फ़ संगीत में मिलता है। जैसे 'चंग' और 'रबाब' की मीठी तान में... एक ऐसी बात है जो शब्दों से परे है! यह हमें बताता है कि जीवन की सच्चाई शोर में नहीं, बल्कि आत्मा की धुन में बसती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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