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फ़ितरत ने मुझे बख़्शे हैं जौहर मलाकूती
ख़ाकी हूँ मगर ख़ाक से रखता नहीं पैवंद

By nature, I have been gifted with a divine essence, Though I am dust, I do not relinquish my pride.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

प्रकृति ने मुझे एक दैवीय सार प्रदान किया है, हालाँकि मैं धूल हूँ, फिर भी मैं अपना गर्व नहीं छोड़ता।

विस्तार

यह शेर इंसान के भीतर की उस जंग को बयां करता है, जो उसकी नश्वर देह और उसकी अमर आत्मा के बीच होती है। शायर कह रहे हैं कि मेरा शरीर तो मिट्टी का है, लेकिन मेरी रूह, मेरा जौहर... वो तो किसी फरिश्ते जैसा है। वो इतनी ऊँचा है कि मिट्टी की सीमाओं में कैद नहीं हो सकता। यह इंसान की उस अमरता को सलाम है जो देह से कहीं ऊपर है।

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