मुद्दत से है आवारा-ए-अफ़्लाक मिरा फ़िक्र कर दे इसे अब चाँद के ग़ारों में नज़र-बंद

“For ages, my thought was a wanderer of the heavens, now confine it in the chambers of the moon.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

बहुत समय से मेरा विचार आकाश का भटकने वाला था, इसे अब चाँद की गुफाओं में कैद कर दो।

विस्तार

यह शेर वास्तव में एक बेचैन मन की कहानी कहता है। शायर कहते हैं कि उनका ख़्याल, उनका फ़िक्र, बहुत दिनों से आसमानों में भटक रहा है, कहीं भी ठहरा नहीं। वे इस भटकन से थक चुके हैं, और अब वे बस एक जगह चाहते हैं—चाँद की शांत, रहस्यमयी गुफाओं में। यह सिर्फ़ शांति की नहीं, बल्कि एक स्थिरता की पुकार है, जो जीवन के शोर में खो गई है।

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