दरवेश-ए-ख़ुदा-मस्त न शर्क़ी है न ग़र्बी
घर मेरा न दिल्ली न सफ़ाहाँ न समरक़ंद
“The gateway to God is intoxicated, neither eastern nor western; my home is neither Delhi, nor Safahan, nor Samarkand.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
खुदा के दरवेश मस्त न पूरब है न पश्चिम; मेरा घर न दिल्ली है न सफ़ाहाँ न समरक़ंद।
विस्तार
यह शेर बताता है कि सच्चा आध्यात्मिक ठिकाना कहीं भौतिक नहीं हो सकता। शायर कहते हैं कि ख़ुदा के मस्त दरवेश का न कोई पूर्वी ठिकाना है और न ही कोई पश्चिमी। उनका मन कहीं दिल्ली में नहीं, न सफ़ाहाँ में और न ही समरकंद में। यह एक गहरा दर्शन है—कि असली घर तो दिल में है, उस रूह में जो सीमाओं से परे है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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