Sukhan AI
तू बर्ग-ए-गयाहे न दही अहल-ए-ख़िरद रा
ओ किश्त-ए-गुल-ओ-लाला ब-बख़शद ब-ख़रे चंद

O, you who are not the leaf of the passing moment, nor the people of wisdom, May the loan of roses and lilies grant you a few purchases.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

हे, तू क्षणभंगुर पत्ता नहीं और न ही बुद्धिमान लोगों का समूह; ओ, गुलाब और चमेली का ऋण, तुम्हें कुछ खरीददारी दे।

विस्तार

यह शेर न केवल एक दुआ है, बल्कि एक ज़िम्मेदारी की बात भी है। शायर, अल्लामा इकबाल, कहते हैं कि ज्ञान और अक्लमंदी का जो पत्ता है, उसे मत मुरझाओ। यह पत्ता अहल-ए-ख़िरद (समझदार लोगों) का है। और जो ख़ूबसूरत बाग़ है, गुलाब और चमेली का, वो सिर्फ़ उन चंद लोगों को बख़्शना, जो सच में क़ाबिल हैं। यह शेर योग्यता और इल्म की अहमियत बताता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.