मैं जभी तक था कि तेरी जल्वा-पैराई न थी — अल्लामा इक़बाल
मैं जभी तक था कि तेरी जल्वा-पैराई न थी
जो नुमूद-ए-हक़ से मिट जाता है वो बातिल हूँ मैं
“Until I experienced your divine splendor, I was unaware; I am that illusion which vanishes from the truth.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
जब तक मुझे तुम्हारा दिव्य तेज नहीं मिला, मैं अनजान था; मैं वह भ्रम हूँ जो सत्य से मिट जाता है।
विस्तार
यह शेर अल्लामा इकबाल साहब ने हकीकत और अपनी मौजूदगी के अहसास पर लिखा है। शायर कह रहे हैं कि जब तक उन्हें कोई दिव्य रूप नहीं मिला, वह सिर्फ एक भ्रम थे। वो 'नुमूद-ए-हक़' यानी सच्चाई से मिट जाने वाले, बे-असर थे। यह अहसास है कि हमारा वजूद कितना क्षणभंगुर है, जब तक हम सत्य से नहीं मिलते।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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