सख़्तियाँ करता हूँ दिल पर ग़ैर से ग़ाफ़िल हूँ मैं — अल्लामा इक़बाल
“I endure hardships on my heart, oblivious to others' presence, Oh, how well you spoke! I am cruel, I am ignorant.”
अर्थ
मैं अपने दिल पर कठिनाइयाँ सहता हूँ, और दूसरों की उपस्थिति से अनजान हूँ। आह, आपने कितनी अच्छी बात कही! मैं क्रूर हूँ, मैं अज्ञानी हूँ।
विस्तार
यह शेर आत्म-जागरूकता और आत्म-भ्रम के बीच के गहरे फासले को बयां करता है। शायर कहते हैं कि वह अपने दिल पर सख़्ती करते हैं, लेकिन उन्हें इस बात का एहसास भी नहीं है। फिर, वह किसी की बात सुनकर खुद को आईने में देखते हैं—कि वे कितने ज़ालिम और कितने जाहिल हैं। यह एहसास बहुत दर्दनाक होता है, लेकिन यही सच्चाई है।
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