चमन में तल्ख़-नवाई मिरी गवारा कर कि ज़हर भी कभी करता है कार-ए-तिर्याक़ी

“In the garden, let my bitterness be pleasing to you, For even poison sometimes performs the deed of an antidote.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

चमन में तल्ख़-नवाई मेरी गवारा कर, कि ज़हर भी कभी करता है कार-ए-तिर्याक़ी। अर्थात्, मेरे मन की कड़वाहट को स्वीकार कर लेना, क्योंकि ज़हर भी कभी-कभी जीवन देने वाले औषधि का काम करता है।

विस्तार

यह शेर एक गहरे विरोधाभास की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि मेरे मन की तल्ख़-नवाई को स्वीकार करो। क्यों? क्योंकि जीवन में हर चीज़ का दूसरा पहलू होता है। यह ज़हर की बात कर रहे हैं, लेकिन इसका मतलब है कि हमें कभी भी किसी चीज़ को केवल 'बुरा' मानकर खारिज नहीं करना चाहिए। कभी-कभी जो सबसे कठोर होता है, वही सबसे बड़ी दवा बन जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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