न चीनी ओ अरबी वो न रूमी ओ शामी समा सका न दो आलम में मर्द-ए-आफ़ाक़ी

“Neither Chinese nor Arabic, nor Rumi nor Shami, Could conquer the man of the horizons.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

न चीनी और न अरबी, न रूमी और न शम्मी, दो आलम में आफाकी मर्द को वश में कर सका।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरे विचार को सामने रखता है—वह शख़्स जो किसी एक दायरे में बंध नहीं सकता। शायर कहते हैं कि यह इंसान इतना विशाल है, इतना व्यापक है कि न चीनी संस्कृति में समाया जा सकता है, न अरबी में, न रूहानी रमी के विचारों में, और न ही शम्मी के विचारों में। यह तो एक खुली उड़ान है, एक ऐसी आत्मा की बात है जो हर सीमा को पार करती है।

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