करेगी दावर-ए-महशर को शर्मसार इक रोज़ किताब-ए-सूफ़ी-ओ-मुल्ला की सादा-औराक़ी

“One day she will bring shame to the gates of Judgment, / With the simple pages of the book of Sufism and Mullah.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

एक दिन यह सूफी और मुल्ला की किताब के सादे पन्नों से क़यामत के दरवाज़े को शर्मसार कर देगी।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक बात कहता है। शायर साहब कहते हैं कि जब हिसाब होगा... यानी क़यामत का दिन आएगा... तब सूफ़ियों की सादगी भरी किताब, मज़ाक उड़ाएगी उन तमाम नियमों की जो सिर्फ़ दिखावे पर आधारित हैं। यह इल्म-ए-सूफ़ियत की सच्चाई को, बाहरी दिखावे से ऊपर रखता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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