कहीं इस आलम-ए-बे-रंग-ओ-बू में भी तलब मेरी — अल्लामा इक़बाल
कहीं इस आलम-ए-बे-रंग-ओ-बू में भी तलब मेरी
वही अफ़्साना-ए-दुंबाला-ए-महमिल न बन जाए
“Even in this colorless and scentless world, may my desire not become that tale of the burdens to be carried.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
कहीं इस रंगहीन और गंधहीन दुनिया में भी मेरी चाहत वैसी बोझिल कहानी न बन जाए।
विस्तार
यह शेर गहरे अहसास और उम्मीदों के बारे में है। शायर कहते हैं कि इस दुनिया में, जो पहले से ही रंग-ओ-बू से खाली है, मेरी ये तलब... ये जो मेरा जुनून है... ये भी कोई भारी, बोझिल कहानी न बन जाए। यह एक तरह की दुआ है कि मेरा इश्क़ सिर्फ एक दर्दनाक किस्सा बनकर न रह जाए।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
