उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी से अंजुम सहमे जाते हैं — अल्लामा इक़बाल
“From the rise of the mortal, the stars are startled, Lest this broken star should become the full moon of love.”
अर्थ
मिट्टी के मनुष्य के उत्थान से आसमान के तारे सहम जाते हैं, कि कहीं यह टूटा हुआ तारा प्रेम का पूर्ण चंद्रमा न बन जाए।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरे विचार को छूता है—कि महानता कहीं भी आ सकती है। आसमान के तारे, जो खुद को पूर्ण मानते हैं, इसलिए घबरा जाते हैं क्योंकि एक साधारण, टूटा हुआ तारा भी कहीं न कहीं जाकर चाँद जैसा बन सकता है। शायर कहते हैं कि असलियत में कोई भी चीज़ अपनी वर्तमान स्थिति से कहीं ज़्यादा ऊँचाई हासिल कर सकती है। यह उम्मीद और संभावना का संदेश है।
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