बनाया इश्क़ ने दरिया-ए-ना-पैदा-कराँ मुझ को — अल्लामा इक़बाल

बनाया इश्क़ ने दरिया-ए-ना-पैदा-कराँ मुझ को ये मेरी ख़ुद-निगह-दारी मिरा साहिल न बन जाए

“Love has created a river where I was never born; let my own gaze not become its shore.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

इश्क़ ने मुझको एक ऐसा दरिया बना दिया है जहाँ मेरा कोई जन्म नहीं हुआ; यह मेरी अपनी नज़र (या ध्यान) मेरे लिए किनारा न बन जाए।

विस्तार

यह शेर उस आशिक़ की हालत बयां करता है जो इश्क़ के सैलाब में बह गया है। शायर कह रहे हैं कि प्यार ने उन्हें एक अनियंत्रित दरिया बना दिया है। और अब उनका डर यह है कि उनका अपना संयम, उनकी अपनी 'ख़ुद-निगह-दारी', भी उनके लिए सहारा न बन जाए। यह एक गहरा एहसास है कि जब आप भावनाओं के आगे होते हैं, तो अपनी पहचान और नियंत्रण खोने का डर कैसा होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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