मैं जानता हूँ अंजाम उस का — अल्लामा इक़बाल
मैं जानता हूँ अंजाम उस का
जिस मारके में मुल्ला हों ग़ाज़ी
“I know the fate of him who strikes the Mullah as a Ghazi.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मैं जानता हूँ उस व्यक्ति का अंजाम, जो मुल्ला को ग़ाज़ी के रूप में मारता है।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ एक घटना का बयान नहीं है, बल्कि सत्ता के संतुलन पर एक गहरा फ़लसफ़ा है। शायर कहते हैं कि जिस शख़्स ने धार्मिक और सैन्य, दोनों तरह की शक्तियों को चुनौती दी है, उसका अंजाम क्या होगा। यह बताता है कि जब कोई व्यक्ति हर नियम और हर सीमा को पार करने की कोशिश करता है, तो उसे अंततः एक कीमत चुकानी पड़ती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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