दिल है मुसलमाँ मेरा न तेरा — अल्लामा इक़बाल
दिल है मुसलमाँ मेरा न तेरा
तू भी नमाज़ी मैं भी नमाज़ी
“My heart is Muslim, neither yours nor mine You are not a worshipper, and I am not a worshipper.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मेरा दिल मुसलमाँ है, न तुम्हारा न मेरा। तुम भी नमाज़ी नहीं हो और मैं भी नमाज़ी नहीं हूँ।
विस्तार
ये शेर सिर्फ इश्क़ की बात नहीं करता, बल्कि रूह की आज़ादी की बात करता है। शायर कहते हैं कि दिल का मुसलमाँ होना मतलब है कि वो दिल सिर्फ अल्लाह का है। आप कितने भी नेक, कितने भी नमाज़ी क्यों न हों, आपका इबादत का एहसास, आपका ईमान—ये सब किसी इंसान पर निर्भर नहीं होना चाहिए। ये एक आत्म-निर्भर आस्था का संदेश है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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