रौशन है जाम-ए-जमशेद अब तक — अल्लामा इक़बाल
रौशन है जाम-ए-जमशेद अब तक
शाही नहीं है बे-शीशा-बाज़ी
“The cup of Jamshid is still glowing, The art of empty play is no longer royal.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
जमशेद का जाम अभी भी रोशन है, लेकिन खाली खेल का कला अब शाही नहीं रही।
विस्तार
यह शेर हमें बताता है कि दुनिया की शान-ओ-शौकत कितनी अस्थायी होती है। 'जमशेद' एक महान राजा का प्रतीक है, जो बड़े गौरव को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि जमशेद का जाम अभी भी रोशन है, यानी कभी बहुत रौनक थी.... लेकिन जो 'बे-शीशा-बाज़ी' है, वह कभी भी शाही नहीं हो सकती। इसका मतलब है कि बाहरी दिखावा, चाहे कितना भी भव्य क्यों न हो, हमेशा सच्चाई के सामने फीका पड़ जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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