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अगरचे बहर की मौजों में है मक़ाम इस का
सफ़ा-ए-पाकी-ए-तीनत से है गुहर का वुज़ू

Though its station is in the waves of the ocean, its cleansing is from the purity of the Trinity.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

भले ही इसका स्थान समुद्र की लहरों में है, इसका शुद्धिकरण त्रिमूर्ति की पवित्रता से है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने आंतरिक पवित्रता का गहरा संदेश दिया है। 'बहर की मौजें' जीवन की कठिनाइयां, दुनिया का शोरगुल हैं। शायर कह रहे हैं कि भले ही किसी का मक़ाम दुनिया के तूफ़ानी माहौल में हो, लेकिन उसकी असलियत, उसकी पवित्रता... वो तो उसके अपने 'तीनत' यानी अस्तित्व के शुद्ध दर्पण से आती है। यह शेर बताता है कि बाहरी हालात चाहे कितने भी उथल-पुथल वाले क्यों न हों, आपकी असल पहचान हमेशा शुद्ध रहेगी।

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