मैं नौ-नियाज़ हूँ मुझ से हिजाब ही औला कि दिल से बढ़ के है मेरी निगाह बे-क़ाबू

“I am a woman of many desires, from whom the veil is my only piety, For my gaze, which exceeds the heart's capacity, is uncontrollable.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मैं नौ-नियाज़ हूँ, और मुझ से हिजाब ही औला है; क्योंकि दिल से बढ़ के है मेरी निगाह बे-क़ाबू।

विस्तार

यह शेर सिर्फ मोहब्बत की बात नहीं करता, यह उस नज़रों के जादू की बात करता है जो खुद को काबू नहीं रख पाती। शायर कह रहे हैं कि मैं नौ-नियाज़ हूँ, यानी मेरी चाहतें बहुत हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि मेरी नज़र... यह दिल से भी ज़्यादा बे-क़ाबू है। यह एक ऐसी बेचैनी है जो बस देखने मात्र से हो उठती है। क्या आपने कभी ऐसी नज़र महसूस की है जो आपको अपनी मर्जी से ही कहीं और खींच ले?

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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