जमील-तर हैं गुल ओ लाला फ़ैज़ से इस के
निगाह-ए-शाइर-ए-रंगीं-नवा में है जादू
“The rose and the beloved are fragrant from Faiz's verses, For the poet's colorful gaze holds a magic.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
फूल और महबूब फ़ैज़ के शब्दों से सुगंधित हैं, क्योंकि शायर की रंगीन निगाहों में जादू है।
विस्तार
यह शेर हमें कला और नज़र के जादू के बारे में बताता है। शायर कहते हैं कि बेशक, किसी महान शायर की शायरी में भी एक खूबसूरती होती है, जैसे फ़ैज़ साहब की शायरी में है। लेकिन, असली जादू.... असली नशा तो उस शायर की नज़र में है, जो हर चीज़ को एक नए रंग में देख सकता है! यह सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, यह तो नज़रिया है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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