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गाह मिरी निगाह-ए-तेज़ चीर गई दिल-ए-वजूद
गाह उलझ के रह गई मेरे तवहहुमात में

Sometimes my sharp gaze tore apart the heart of existence, And sometimes it remained entangled in my very essence.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

कभी-कभी मेरी तेज़ नज़र ने वजूद के दिल को चीर डाला, और कभी-कभी वह मेरे तवायहुमात में उलझ कर रह गई।

विस्तार

यह शेर महबूब की निगाह के जादू को बयान करता है। शायर कहते हैं कि उस तेज़ नज़र ने सिर्फ़ दिल को नहीं, बल्कि मेरे वजूद को चीर डाला है। लेकिन सबसे बड़ी बात क्या है? कि मैं उस नज़र में उलझ गया हूँ! मेरा तवहहुमात, यानी मेरा पूरा अस्तित्व, उस नज़र के जाल में ऐसे फँस गया है, जैसे कोई जाली हो। यह इश्क़ की वो हालत है, जहाँ दर्द भी एक नशा बन जाता है।

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पाठ
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