तीन सौ साल से हैं हिन्द के मय-ख़ाने बंद — अल्लामा इक़बाल
तीन सौ साल से हैं हिन्द के मय-ख़ाने बंद
अब मुनासिब है तिरा फ़ैज़ हो आम ऐ साक़ी
“The tavern of Hind has been closed for three hundred years, Now it is appropriate for your grace to flow, O cupbearer.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तीन सौ साल से हिन्द के मय-ख़ाने बंद हैं। अब मुनासिब है कि ऐ साक़ी, तेरा फ़ैज़ आम हो जाए।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ मदिरालय बंद होने की बात नहीं करता.... यह एक आत्मा की उदासी और तड़प को बयान करता है। शायर कहते हैं कि हमारी ज़िंदगी के रंग.... हमारे मय-ख़ाने सदियों से बंद हैं। और अब तो वक़्त आ गया है कि साक़ी.... अपने फ़ैज़ की नदियाँ बहाए! यह एक गहरी पुकार है.... एक बदलाव की पुकार!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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