मेरी मीना-ए-ग़ज़ल में थी ज़रा सी बाक़ी
शेख़ कहता है कि है ये भी हराम ऐ साक़ी
“In my pearl-like ghazal, there was a little bit remaining, But the Sheikh says that even this is forbidden, O cupbearer.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मेरी ग़ज़ल की मीना में थोड़ी सी बची थी, लेकिन शेख कहते हैं कि यह भी हराम है, ऐ साक़ी।
विस्तार
यह शेर कलात्मक जुनून और सामाजिक पाखंड के बीच की लड़ाई को दिखाता है। शायर कहते हैं कि मेरी ग़ज़ल की महफ़िल में अभी भी थोड़ी सी 'शराब' (यानी कला) बाकी है। लेकिन शेख साहब, जो नैतिकता के प्रतीक हैं, कहते हैं कि यह भी हराम है! यह एक गहरा संघर्ष है—क्या हमें अपनी कला को आज़ाद रखना चाहिए, या समाज की बंदिशों के आगे झुक जाना चाहिए?
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