जिसे कसाद समझते हैं ताजिरान-ए-फ़रंग
वो शय मता-ए-हुनर के सिवा कुछ और नहीं
“What the merchants of the West deem a crown,”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
जिसे कसाद समझते हैं विदेशी व्यापारी, वह चीज़ हुनर की महत्ता के सिवा कुछ और नहीं।
विस्तार
यह शेर हमें कला की असली पहचान के बारे में बताता है। शायर कहते हैं कि दुनिया के तجارत वाले, जो चीज़ों को बस कबाड़ समझते हैं.... वो असल में किसी कारीगरी या कला की निखार हुई चीज़ होती है। इसका मतलब है कि सच्ची कला का मोल हमेशा उन लोगों को समझ आता है, जो दिल से देखते हैं, न कि सिर्फ़ पैसे से।
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