बड़ा करीम है 'इक़बाल'-ए-बे-नवा लेकिन
अता-ए-शोला शरर के सिवा कुछ और नहीं
“Though Iqbal's poetic brilliance is immense, Except the gift of burning embers, nothing else is given.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
इक़बाल का काव्य-सौंदर्य बहुत बड़ा है, लेकिन शोला (आग) और शरर (चिंगारी) के उपहार के अलावा कुछ और नहीं दिया गया है।
विस्तार
यह शेर एक गहरे फ़र्क़ को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जो इक़बाल या करिश्मा बिना किसी कोशिश के मिलता है, वह बड़ा ही क़ीमती है। लेकिन, असली बात तो उस चिंगारी (शरर) में है जो आग से निकलती है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में अचानक मिलने वाला, गहरा और तीव्र अनुभव, लगातार मिलने वाली सहज कृपा से कहीं ज़्यादा असरदार होता है।
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