इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर

“Whether love is in the veil, or beauty is in the veil, Either reveal yourself, or reveal me.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

चाहे इश्क़ हिजाब में हो या हुस्न हिजाब में, या तो ख़ुद प्रकट हो या मुझे प्रकट कर।

विस्तार

यह शेर उस गहरे सवाल को उठाता है कि क्या प्यार और खूबसूरती हमेशा पर्दे में रहते हैं? शायर कहते हैं कि चाहे इश्क़ हो या हुस्न, दोनों हिजाब में हैं। वह महबूब से पूछते हैं कि या तो अपना सच सामने लाओ, या मुझे अपनी सच्चाई का गवाह बनाओ। यह खुलापन और सच्चाई की पुकार है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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पाठ
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