“Adorn the tresses that are already glorious, Hunt the heart and the gaze, with wit and wisdom's might.”
गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर, होश ओ ख़िरद शिकार कर क़ल्ब ओ नज़र शिकार कर। (अर्थात: जो केश पहले से ही शानदार हैं, उन्हें और भी शानदार बनाओ; बुद्धि और समझ से दिल और निगाह को शिकार बनाओ।)
यह शेर एक गहरे, जुनून भरे इकरार को बयां करता है। शायर अपनी महबूबा से कह रहे हैं कि उनकी चमक और खूबसूरती को और बढ़ा दो। लेकिन असल बात तो दूसरी पंक्ति में है—आपकी सादगी, आपका नूर... ये सब एक शिकार बन गए हैं। आपने सिर्फ दिल ही नहीं, बल्कि मेरी समझ और मेरी नज़र को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
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