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क्या सूफ़ी ओ मुल्ला को ख़बर मेरे जुनूँ की
उन का सर-ए-दामन भी अभी चाक नहीं है

O Sufi or Mullah, know not of my passion, Their own foreheads have not yet turned to the grindstone.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

सूफ़ी और मुल्ला को मेरे जुनून का कोई ख़बर नहीं है, उनका तो अपना सर-ए-दामन भी अभी चकला नहीं है।

विस्तार

यह शेर जुनून की एक अद्भुत गहराई को दिखाता है। शायर यहाँ कहते हैं कि सूफ़ी और मुल्ला, ये लोग मेरे जुनून के बारे में बिल्कुल नहीं जानते। इसका मतलब यह है कि मेरा यह इश्क़ या यह पागलपन इतना गहरा और तीव्र है कि उन्होंने अभी तक मेरे होने का एहसास भी नहीं किया है। यह एक तरह का विद्रोह है... एक ऐसी भावना जो किसी के नियंत्रण में नहीं है।

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