है ज़ौक़-ए-तजल्ली भी इसी ख़ाक में पिन्हाँ
ग़ाफ़िल तू निरा साहिब-ए-इदराक नहीं है
“The intoxication of divine manifestation is also concealed in this dust; you are not oblivious, O master of perception.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
दिव्य प्रकटीकरण का नशा भी इसी धूल में छिपा है; तुम लापरवाह नहीं हो, ऐ ज्ञान के स्वामी।
विस्तार
यह शेर हमें एक बहुत गहरी बात समझाता है। शायर कहते हैं कि परमात्मा की झलक, उसका ज़ौक़-ए-तजल्ली, कहीं दूर नहीं है, बल्कि इसी साधारण सी धूल में भी छिपा है। और जो इंसान ग़ाफ़िल है, उसे याद दिलाते हैं कि यह इल्म-ए-इदराक, यह समझ, कोई ख़ास लोगों का हक़ नहीं है। यह तो हर दिल में मौजूद है, बस उसे पहचानना बाकी है।
ऑडियो
पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
