दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं है
फिर इस में अजब क्या कि तू बेबाक नहीं है
“The gaze is pure, devoid of burning passion, Yet what wonder that you are not shameless?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
दिल में जलन नहीं है, पर आँखें पवित्र नहीं हैं। फिर भी इसमें आश्चर्य क्या कि तुम बेबाक हो।
विस्तार
यह शेर एक गहरे विरोधाभास को बयान करता है। आशिक़ को महबूब की निगाह में एक अजीब सी बेचैनी महसूस होती है। शायर कहते हैं कि नज़रों में दर्द नहीं है, पर वो साफ़ भी नहीं हैं। तो इसमें अजब क्या है, कि आप इतने बेबाक हैं? यह महबूब के व्यवहार पर एक तीखा सवाल है।
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