उसे सुब्ह-ए-अज़ल इंकार की जुरअत हुई क्यूँकर मुझे मालूम क्या वो राज़-दाँ तेरा है या मेरा

“By what audacity did he deny the dawn of eternity to her? / I do not know if that secret is yours or mine.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

उसे युगों के आरंभ में इंकार करने की हिम्मत कैसे हुई? मुझे नहीं पता कि वह रहस्य तुम्हारा है या मेरा।

विस्तार

यह शेर आलामा इकबाल के गहन दर्शन को दर्शाता है। शायर पूछ रहे हैं कि किसी में इतनी हिम्मत कहाँ से आई कि वो 'सुब्ह-ए-अज़ल' (सृष्टि के आरंभ) में इंकार कर सके। और फिर वो कहते हैं कि मुझे नहीं मालूम कि वो राज़-दाँ—वो गहरा रहस्य—तुम्हारा है या मेरा। यह एक ऐसे भावनात्मक टूटन की बात करता है, जहाँ इंसान को पता ही नहीं चलता कि उसका दर्द किसका है।

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