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मय वो क्यूँ बहुत पीते बज़्म-ए-ग़ैर में या रब
आज ही हुआ मंज़ूर उन को इम्तिहाँ अपना

Why did they drink so much wine in the rival's assembly, O Lord?Only today did they approve of my trial.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हे भगवान, वे प्रतिद्वंद्वी की महफ़िल में इतनी शराब क्यों पी रहे थे? आज ही तो उन्होंने मेरी परीक्षा को मंज़ूर किया है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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