मंज़र इक बुलंदी पर और हम बना सकते
अर्श से उधर होता काश के मकाँ अपना
“We could have fashioned another panorama on a loftier height,If only our dwelling were beyond the Empyrean.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हम एक और ऊँचाई पर एक और नज़ारा बना सकते थे, काश हमारा ठिकाना अर्श से भी परे होता।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
