सियह-मस्ती है अहल-ए-ख़ाक को अब्र-ए-बहारी से
ज़मीं जोश-ए-तरब से जाम-ए-लबरेज़-ए-सिफ़ाली है
“A dark intoxication grips the dust-born from the spring cloud's sweep, The earth, with joy's surge, is an overflowing earthen cup held deep.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
बसंत के बादल से धरती के जीवों पर गहरी मदहोशी छा जाती है। धरती स्वयं आनंद के जोश से एक लबालब मिट्टी का प्याला बन जाती है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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