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निशान-ए-बे-क़रार-ए-शौक़ जुज़ मिज़्गाँ नहीं बाक़ी कई काँटे हैं और पैराहन-ए-शक्ल-ए-निहाली है

Of restless passion's sign, nought but the lashes stay,Many thorns there are, and a sapling's form the garment does display.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

बेचैन चाहत का निशान सिर्फ पलकें ही बची हैं। कई कांटे हैं और पोशाक एक छोटे पौधे के आकार की है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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