ग़ज़ल
सुर्मा-ए-मुफ़्त-ए-नज़र हूँ मिरी क़ीमत ये है
سرمہء مفتِ نظر ہوں مری قیمت یہ ہے
यह ग़ज़ल छिपे हुए मूल्य और गहरे दुख के विषयों को उजागर करती है। शायर स्वयं को एक ऐसी भेंट बताता है जो दिखने में मुफ्त है, पर जिसका सूक्ष्म प्रभाव एक गहरा एहसान है। वह ऐसे तीव्र दुख की बात करता है जो महबूब के चेहरे पर भी ज़ाहिर हो सकता है, और अपने जीवन के सफ़र को आंतरिक वीराने और प्रबल जुनून से भरा दिखाता है, जहाँ उसके हर ज़ख़्म से गहरी तड़प ज़ाहिर होती है।
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1
सुर्मा-ए-मुफ़्त-ए-नज़र हूँ मिरी क़ीमत ये है
कि रहे चश्म-ए-ख़रीदार पे एहसाँ मेरा
मैं मुफ्त नज़र का सुरमा हूँ, मेरी कीमत यह है कि मेरा एहसान देखने वाले की आँख पर रहे।
2
रुख़्सत-ए-नाला मुझे दे कि मबादा ज़ालिम
तेरे चेहरे से हो ज़ाहिर ग़म-ए-पिन्हाँ मेरा
हे निर्दयी प्रिय, मुझे रोने की अनुमति दो, कहीं ऐसा न हो कि मेरा छिपा हुआ दुख तुम्हारे चेहरे पर ज़ाहिर हो जाए।
3
ख़ल्वत-ए-आबला-ए-पा में है जौलाँ मेरा
ख़ूँ है दिल तंगी-ए-वहशत से बयाबाँ मेरा
मेरा बेचैन भटकना मेरे पाँव के छाले की एकांतता में सीमित है। मेरे दिल का खून, वहशत की तंगी से, मेरा रेगिस्तान बन गया है।
4
ज़ौक़-ए-सरशार से बे-पर्दा है तूफ़ाँ मेरा
मौज-ए-ख़म्याज़ा है हर ज़ख़्म नुमायाँ मेरा
मेरा तूफ़ान अत्यधिक उत्साह के कारण बेपर्दा है। मेरा हर ज़ाहिर ज़ख़्म एक उबासी की लहर है, जो थकान या किसी परिणाम को दर्शाता है।
5
'ऐश-बाज़ी-कदा-ए-हसरत जावेद-रसा
ख़ून-ए-आदीना से रंगीं है दबिस्ताँ मेरा
मेरे काव्य का दबिस्ताँ (मार्ग), जो हसरतों का एक शाश्वत आनंद-भवन है, बीते हुए दिनों के रक्त (संघर्षों) से रंगा हुआ है।
6
हसरत-ए-नश्शा-ए-वहशत न ब-सइ-ए-दिल है
अर्ज़-ए-ख़म्याज़ा-ए-मजनूँ है गरेबाँ मेरा
पागलपन के नशे की हसरत मेरे दिल की अपनी कोशिश नहीं है; मेरा गरेबाँ तो मजनूँ की गहरी हसरत और उसकी बेकरारी का इज़हार है।
7
'आलम-ए-बे-सर-ओ-सामानी-ए-फ़ुर्सत मत पूछ
लंगर-ए-वहशत-ए-मजनूँ है बयाबाँ मेरा
मेरी फ़ुर्सत की बे-सर-ओ-सामानी (विरान अवस्था) के बारे में मत पूछो। मेरा बयाबाँ (रेगिस्तान) मजनूँ की वहशत (दीवानगी) का लंगर (ठहराव) है।
8
बे-दिमाग़ तपिश-ए-रश्क हूँ ऐ जल्वा-ए-हुस्न
तिश्ना-ख़ून-ए-दिल-ओ-दीदा है पैमाँ मेरा
ऐ हुस्न की चमक, मैं ईर्ष्या की तपिश से बेहाल हूँ। मेरा वादा दिल और आँखों के लहू का प्यासा है।
9
फ़हम ज़ंजीरी-ए-बे-रब्ती-ए-दिल है या-रब
किस ज़बाँ में है लक़ब ख़्वाब-ए-परेशाँ मेरा
हे प्रभु, क्या समझ दिल की अव्यवस्था में जकड़ी हुई है? मेरे परेशान सपने का नाम किस भाषा में है?
10
ब-हवस-ए-दर्द-ए-सर-ए-अहल-ए-सलामत ता-चंद
मुश्किल-ए-इश्क़ हूँ मतलब नहीं आसाँ मेरा
ऐ सुरक्षित लोगों, कब तक तुम सिर्फ़ सतही दर्द की इच्छा रखोगे? मैं प्रेम की जटिलता हूँ, मेरा अर्थ समझना आसान नहीं है।
11
बू-ए-यूसुफ़ मुझे गुलज़ार से आती थी 'असद'
दय ने बर्बाद किया पैरहनिस्ताँ मेरा
मुझे गुलज़ार से यूसुफ़ की ख़ुशबू आती थी, असद, पर सर्दी ने मेरे वस्त्रों के बाग़ को तबाह कर दिया है।
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