शौक़ है सामाँ-तराज़-ए-नाज़िश-ए-अरबाब-ए-अज्ज़ ज़र्रा सहरा-दस्त-गाह ओ क़तरा दरिया-आश्ना

“Passion equips the humble souls with cause for lofty pride: a speck commands the desert vast, a drop embraces the sea.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

शौक़ बेबस और आजिज़ लोगों के लिए गर्व का सामान जुटाता है, जिसके सबब एक मामूली ज़र्रा रेगिस्तान पर हुकूमत पाता है और एक क़तरा दरिया से आशना हो जाता है।

विस्तार

ग़ालिब यहाँ समझाते हैं कि जब इंसान के दिल में सच्चा शौक़ या गहरा जज़्बा जागता है, तो उसकी बेबसी और आजिज़ी भी फ़ख़्र में बदल जाती है। दिखने में हम भले ही धूल के एक मामूली ज़र्रे या पानी के एक छोटे क़तरे जैसे हों, लेकिन यह गहरा लगाव उस ज़र्रे को पूरे सहरा की ताक़त देता है और क़तरे को समंदर से मिला देता है। असल में, यह शेर हमें सिखाता है कि मोहब्बत और लगन हमारी तुच्छता को असीमता में बदल देती है।

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