“Every speck of dust is a cup in this tavern of illusion; Majnun's wild whirling is attuned to Laila's beckoning glances.”
इस तिलिस्मी दुनिया का हर एक ज़र्रा शराब के प्याले जैसा है, और मजनूँ का चक्कर काटना लैला की आँखों के इशारों से पूरी तरह वाक़िफ़ है।
ग़ालिब इस बहुरंगी दुनिया को एक जादुई मयख़ाना मानते हैं, जहाँ का हर एक ज़र्रा किसी प्याले की तरह ख़ुदी और हैरत से लबरेज़ है। रेगिस्तान में मजनूँ का पागलों की तरह भटकना कोई बेमक़सद जुनून नहीं, बल्कि लैला की नशीली आँखों के इशारों पर होने वाला एक ख़ास रक़्स है। यह शेर हमें समझाता है कि इस कायनात की हर बेचैनी और हरकत के पीछे दरअस्ल किसी महबूब का ही हसीं इशारा छुपा हुआ है।
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