रश्क कहता है कि उस का ग़ैर से इख़्लास हैफ़ अक़्ल कहती है कि वो बे-मेहर किस का आश्ना

“Jealousy laments, 'Alas, her warmth towards the rival is sincere!' While Reason counters, 'Can one so merciless hold anyone dear?'”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ईर्ष्या कहती है कि अफ़सोस की बात है कि महबूब का प्रतिद्वंद्वी से सच्चा लगाव है, जबकि बुद्धि समझाती है कि वह बेरहम इंसान भला किसी का सच्चा दोस्त कैसे हो सकता है।

विस्तार

ग़ालिब यहाँ दिल की जलन और दिमाग़ की समझदारी के बीच की कशमकश को बयां कर रहे हैं। ईर्ष्या यानी रश्क यह सोचकर तड़पता है कि महबूब किसी ग़ैर से सच्चा प्यार कैसे कर सकता है। मगर अक़्ल एक कड़वी तसल्ली देती है कि जो इंसान फ़ितरत से ही संगदिल और बेदर्द हो, वो आख़िर किसका सगा हो सकता है—यानी रक़ीब भी बस एक भ्रम में जी रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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