निकोहिश माना-ए-बे-रब्ती-ए-शोर-ए-जुनूँ आई
हुआ है ख़ंदा-ए-अहबाब बख़िया जेब-ओ-दामन में
“Censure attended the senseless meaning of my mad outcry,My friends' laughter has become the stitches in my torn collar and hem.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरे पागलपन की आवाज़ के बेतुके अर्थ पर निंदा आई। मेरे दोस्तों की हँसी मेरे गिरेबान और दामन के फटे हुए हिस्सों के लिए टाँके बन गई है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
