हुए उस मेहर-वश के जल्वा-ए-तिमसाल के आगे
पर-अफ़्शाँ जौहर आईने में मिस्ल-ए-ज़र्रा रौज़न में
“Before the splendid image of that sun-faced beauty,The mirror's very essence fluttered like a dust mote in a sunbeam.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
उस सूरज-मुख प्रिय की भव्य छवि के सामने, दर्पण का जौहर रोशनदान में एक धूल के कण की तरह फड़फड़ाने लगा।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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